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जगद्धर भट्ट

जगद्धर भट्ट की संपूर्ण रचनाएँ

उद्धरण 1

धन आरंभ में मधुर प्रतीत होने वाला विष है। वह है। तत्क्षण जीवन को नष्ट करने लगता है, उपभोग करने पर वह पथ्य-कारक होता है और शरीर को दुःखित कर देता है।

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