लौटना पर बेला
लौटना आधुनिक कविताओं
में एक प्रमुख मनोगतता के रूप में अभिव्यक्त है। इस चयन में शामिल कविताओं में लौटने के अनंत भावों को ग्रहण किया का सकता है।
बिंदुघाटी 2.0 : लौट आया हूँ, कोई कुछ भी कह सकता है
• व्लादिमीर : शुरुआत मुश्किल शय है। एस्त्रागान : तुम किसी भी चीज़ से शुरू कर सकते हो। व्लादिमीर : हाँ, लेकिन इसका निर्णय लेना होता है। एस्त्रागान : सही बात। — सैमुअल बेकेट | वेटिंग फ़ॉर गोदो
जापान में आख़िरी दस दिन
तीसरी कड़ी से आगे... 13 अगस्त, 2020 भारत लौटने की 23 अगस्त की फ़्लाइट का कंफ़र्मेशन आ गया है एंबेसी से। अंतत: सीट पक्की हो गई। इतनी अनिश्चितता के बाद, कोई ख़बर आई है, लेकिन इस सूचना का क्या मतल
एक रोज़ हम लौट आना चाहते हैं
मई 2024 तुमने कहा—जाती हूँ और तुमने सोचा कवि केदार की तरह मैं कहूँगा—जाओ लेकिन मेरी लोकभाषा के पास अपने बिंब थे मेरी लोकभाषा में कोई कहीं जाता था ‘तो आता हूँ’ कहकर शेष बच जाता था