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हरिपद होय या विधि लगन

haripad hoy ya widhi lagan

किशोरीदास

किशोरीदास

हरिपद होय या विधि लगन

किशोरीदास

हरिपद होय या विधि लगन।

रच्छा करत सहज दुख नाना जाय मति कौ उगन॥

भरत तन, मन, पाय पुनि-पुनि लखत पग रहि पगन।

ताके बल मदमत्त डोलत जगत दीसत जग न॥

होत दूर दरिद्र दुख सब बुझत तीनों अगन।

'किसोरीदास' हरिव्यास मिले तब महल सुरत लह छगन॥

स्रोत :
  • पुस्तक : कल्याण पत्रिका (संतबानी अंक) (पृष्ठ 292)
  • संपादक : हनुमान प्रसाद पोद्दार
  • रचनाकार : किशोरीदास
  • प्रकाशन : गीता प्रेस गोरखपुर
  • संस्करण : जनवरी 1955

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