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भारत-भारती / वर्तमान खंड / अविद्या

avidyaa

मैथिलीशरण गुप्त

मैथिलीशरण गुप्त

भारत-भारती / वर्तमान खंड / अविद्या

मैथिलीशरण गुप्त

ये सब अ-शिक्षा के कुफल हैं, वास है जिसका यहाँ;

अध्यात्म विद्या का भवन हा! आज वह भारत कहाँ?

धिक्कार है, हम खो चुके हैं आज अपना ज्ञान भी;

खोकर सभी कुछ अंत में खोया महाधन मान्य भी!

हा! सैकड़े पीछे यहाँ दस भी सुशिक्षित जन नहीं!

हाँ, चाह कुलियों की कहीं हो, तो मिलेंगे सब कहीं!!

हतभाग्य भारत! जो कभी गुरुभाव से पूजित रही—

करती भुवन में भृत्यता संतान अब तेरी वही!!!

छाई अविद्या की निशा है, हम निशाचर बन रहे;

हा! आज ज्ञानाऽभाव से वीभत्स रस में सन रहे!

हे राम! इस ऋषि भूमि का उद्धार क्या होगा नहीं?

हम पर कृपा कर आपका अवतार क्या होगा नहीं?

विद्या बिना अब देख लो, हम दुर्गुणों के दास हैं;

हैं तो मनुज हम, किंतु रहते दनुजता के पास हैं।

दाएँ तथा बाएँ सदा सहचर हमारे चार हैं—

अविचार, अँधाचार हैं, व्यभिचार, अत्याचार हैं!

हा! गाढ़तर तमसावरण से आज हम आच्छन्न हैं,

ऐसे विपन्न हुए कि अब सब भाँति मरणासन्न हैं!

हम ठोकरें खाते हुए भी होश में आते नहीं,

जड़ हो गए ऐसे कि कुछ भी जोश में आते नहीं!

स्रोत :
  • पुस्तक : भारत भारती (पृष्ठ 115)
  • रचनाकार : मैथलीशरण गुप्त
  • प्रकाशन : साहित्य सदन चिरगाँव झाँसी
  • संस्करण : 1984
हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

‘हिन्दवी डिक्शनरी’ हिंदी और हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों के शब्दों का व्यापक संग्रह है। इसमें अंगिका, अवधी, कन्नौजी, कुमाउँनी, गढ़वाली, बघेली, बज्जिका, बुंदेली, ब्रज, भोजपुरी, मगही, मैथिली और मालवी शामिल हैं। इस शब्दकोश में शब्दों के विस्तृत अर्थ, पर्यायवाची, विलोम, कहावतें और मुहावरे उपलब्ध हैं।

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