पणिहारी का नया गीत

विनोद पदरज

पणिहारी का नया गीत

विनोद पदरज

और अधिकविनोद पदरज

    पणिहारी

    तेरी कमर के लचके तो सबको दिखते हैं

    पर माथे पर धरी

    भरी जेगड़ का बोझ

    किसी को नहीं दिखता

    पणिहारी तेरी अचक चाल से हलर मलर

    लहँगा तो सबको दिखता है

    पर दाझते पाँवों के छाले

    किसी को नहीं दिखते

    पणिहारी

    तेरी उँगलियों की फाँक में से झाँकती

    कामणगारी आँखें तो सबको दिखती हैं

    पर उनमें घुमड़ती दुख की घटाएँ

    किसी को नहीं दिखतीं

    पणिहारी

    तेरे परेंडे का पानी तो सबको

    मीठा और ठंडा लगता है

    पर कितना मर-मरके माटी

    मटकी रूप धरे है

    आठों पहर झरे है

    किसी को नहीं दिखता

    किसी को भी नहीं।

    स्रोत :
    • रचनाकार : विनोद पदरज
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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