प्रार्थना : गुरु कबीरदास के लिए
pararthna ha guru kabirdas ke liye
विजय देव नारायण साही
Vijay Dev Narayan Sahi
प्रार्थना : गुरु कबीरदास के लिए
pararthna ha guru kabirdas ke liye
Vijay Dev Narayan Sahi
विजय देव नारायण साही
और अधिकविजय देव नारायण साही
परम गुरु
दो तो ऐसी विनम्रता दो
कि अंतहीन सहानुभूति की वाणी बोल सकूँ
और यह अंतहीन सहानुभूति
पाखंड न लगे।
दो तो ऐसा कलेजा दो
कि अपमान, महत्वाकांक्षा और भूख
की गाँठों में मरोड़े हुए
उन लोगों का माथा सहला सकूँ
और इसका डर न लगे
फिर कोई हाथ ही काट खाएगा।
दो तो ऐसी निरीहता दो
कि इस दहाड़ते आतंक के बीच
फटकार कर सच बोल सकूँ
और इसकी चिंता न हो
कि इस बहुमुखी युद्ध में
मेरे सच का इस्तेमाल
कौन अपने पक्ष में करेगा।
यह भी न दो
तो इतना ही दो
कि बिना मरे चुप रह सकूँ।
- पुस्तक : साखी (पृष्ठ 148)
- रचनाकार : विजय देव नारायण साही
- प्रकाशन : सातवाहन
- संस्करण : 1983
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