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शराब के नशे में

sharab ke nashe mein

अच्युतानंद मिश्र

अच्युतानंद मिश्र

शराब के नशे में

अच्युतानंद मिश्र

शराब के नशे में धुत्त एक आदमी

दुतकारता है ज़िंदगी को

कहता है लौट जाऊँगा

मैं अपने घर

तीन आँगन वाले अपने घर

वहाँ धूप होगी

सकुचाती हुई

चूमती हुई माथा

उतरेगी शाम

शराब के नशे में धुत्त आदमी

अपने रतजगे में बुहारता है

सबसे ठंडी रात को

पृथ्वी से बाहर

वह लिखता है इस्तीफ़ा

पढ़ता है ऊँची आवाज़ में

मुझे तबाह नहीं करनी अपनी ज़िंदगी

लानत भेजता हूँ ऐसी नौकरी पर

सुबकते हुए कहता है

लौट जाऊँगा अपने गाँव

खटूँगा अपने खेतों में

चुकाऊँगा ऋण धरती का

दिन की रौशनी में

स्कूल बस पर बेटी को बिठाने के बाद

वह पत्नी की आँखों में आँखें डालकर

क़सम खाता है

वह शराब को कभी हाथ नहीं लगाएगा

मुस्कुराती हुई पत्नी को

वह दुनिया की

सबसे ख़ूबसूरत औरत कहता है

और चला जाता है...

काम पर

स्रोत :
  • रचनाकार : अच्युतानंद मिश्र
  • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

‘हिन्दवी डिक्शनरी’ हिंदी और हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों के शब्दों का व्यापक संग्रह है। इसमें अंगिका, अवधी, कन्नौजी, कुमाउँनी, गढ़वाली, बघेली, बज्जिका, बुंदेली, ब्रज, भोजपुरी, मगही, मैथिली और मालवी शामिल हैं। इस शब्दकोश में शब्दों के विस्तृत अर्थ, पर्यायवाची, विलोम, कहावतें और मुहावरे उपलब्ध हैं।

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