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सोशल मीडिया और हमारे जीवन का अँधेरा

soshal miDiya aur hamare jivan ka andhera

कपिल भारद्वाज

कपिल भारद्वाज

सोशल मीडिया और हमारे जीवन का अँधेरा

कपिल भारद्वाज

और अधिककपिल भारद्वाज

    यह अँधेरा हमारे हिस्से ही आना था।

    जितनी तेज़ी से बदला है दृश्य

    उतनी तेज़ी से नहीं बदलता कुछ भी।

    पिछले दृश्य में एक प्रधानमंत्री

    रो रहा, आँसू दिखाने का उपक्रम करते हुए

    उससे अगले दृश्य में एक आदमी को मारा जा रहा है

    गँड़ासी से, उसकी गर्दन काटी जा रही है

    उससे अगले दृश्य में एक 15 साल की लड़की

    अपनी योनि पर फिरा रही है उँगलियाँ

    उससे अगले दृश्य में पुत्र अपनी माँ को पीट रहा है लाठियों से

    उससे अगले दृश्य में पत्नी पर अश्लील चुटकुला मारकर

    हँस रहा है एक पति

    उससे अगले दृश्य में एक गर्भवती स्त्री

    अपने नंगे पेट पर कैमरा कर रही है जूम

    उससे अगले दृश्य में एक मिसाइल से गिर रहे हैं बम

    उससे अगले दृश्य में एक वृद्ध तीन लड़कियों को कर रहा है मोलेस्ट

    उससे अगले दृश्य में दुनिया हो रही है ख़त्म

    उससे अगले दृश्य में दो छोटे-छोटे बच्चे

    बाजार की भीड़ में कर रहे हैं लड़ाई

    उससे अगले दृश्य में नंगे बदनों का हो रहा है कॉम्पटीशन

    बार बार यही दृश्य हैं

    दिनभर, रात भर।

    यही जीवन का अँधेरा है

    जिसके छँटने का कोई उपाय नजर नहीं आता फ़िलहाल।

    स्रोत :
    • रचनाकार : कपिल भारद्वाज
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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