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सराय में कुछ दिन

saray mein kuch din

नरेंद्र जैन

नरेंद्र जैन

सराय में कुछ दिन

नरेंद्र जैन

अभी चलते चलो

यात्रा एक चिरंतन प्रक्रिया है

ठौर कहीं नहीं

थके-हारे यात्रियों के लिए

पूरब की ओर यहाँ से कोस दूर है

भटियारिन की सराय

वहाँ ज़िंदगी को देखेंगे

आमने-सामने

अस्त होते ही सूरज

प्रकट होगा जीवन

भटियारिन की सराय में

घर को भूलेंगे

सराय में ठहरेंगे

हुक्का गुड़गुड़ाएँगे

दोस्ती गाँठेंगे

हम

प्यार करेंगे भटियारिन से

चलते चलो

ठौर

कहीं कहीं बचा हुआ है।

स्रोत :
  • रचनाकार : नरेंद्र जैन
  • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए अच्युतानंद मिश्र द्वारा चयनित

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