Font by Mehr Nastaliq Web

सरग से बढ़िके लागै गाँव

sarag se baDhike lagai gaanv

आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

सरग से बढ़िके लागै गाँव

आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

और अधिकआद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

    उसरा के मुड़वा चढ़ि बोला टिउबोलिया कै पानी,

    उल्टी गंगा बही नहरिया जाय सरग मड़रानी,

    परती बंजर से फूटी चारिउ ओर जवानी,

    नाचै लागी सगर सेंवरिया पहिरि चुनरिया धानी।

    पायन तरे सगर जुड़वनिया सिर के ऊपर छाँव।

    सरग से बढ़िके लागै गाँव॥

    बटन दबावत धावति आवै अब पताल से गंगा,

    दरसन मज्जन पान किहे से तन-मन सगरौ चंगा,

    नए भगीरथ के करतब से गउवाँ रंग बिरंगा,

    धरती की सोभा के आगे लागै सरग पसंगा।

    फेल भए गउवाँ के आगे देवतन के सब दाँव।

    सरग से बढ़िके लागै गाँव॥

    आगे-आगे चलै भगीरथ गहे प्रगति कै डोरी,

    नई जवानी बही गाँव के नस-नस पोरी पोरी,

    अँधियरवा कै पता कतहूँ सगरौ रैन अँजोरी,

    टेकटरवा चढ़ि चली लच्छिमी अब गउवाँ की ओरी।

    जहाँ पहुँची नई किरनिया रहा कौनौ ठाँव।

    सरग से बढ़िके लागै गाँव॥

    सूरसती के मंदिर सगरौ गाँव गाँव मदरसा,

    बही ग्यान के गंगा लखिके गउआँ कै मन हरसा,

    रात बनी चाँदी के दिनवा लागै कंचन बरसा,

    गउआँ के रूप देखि के देवतन के मन तरसा।

    डोलि गवा इन्नर के मनवा थिरकन लागे पाँव।

    सरग से बढ़िके लागै गाँव॥

    भय का भागा भूत पयसरम बल के बलिहारी,

    मुर्दहिया ताली पर नाचीं लछिमी हाथ पसारी,

    मनई कै पौरुख के आगे भुतऊ माने हारी,

    करै पयसंरम मौज उड़ावै नाहीं रहै भिखारी।

    ओकर पेट भरै कौनी विधि जे हर जोतै बाँव।

    सरग से बढ़िके लागै गाँव॥

    चला सहर से हाथ मिलावै,गउआँ छाती ताने,

    मंतर फूँकै नई सड़किया नरखोरिया के काने,

    जे आपन रोजगार सँभारे ओनकै पेट अघाने,

    बितवै दिना मटरगस्ती मा ओकर रामै जाने।

    ओकर पेट भरे यहि जुग मा जे तोरे करिहाँव।

    सरग से बढ़िके लागै गाँव॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : माटी औ महतारी (पृष्ठ 9)
    • रचनाकार : आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'
    • प्रकाशन : अवधी अकादमी

    संबंधित विषय

    हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

    हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

    ‘हिन्दवी डिक्शनरी’ हिंदी और हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों के शब्दों का व्यापक संग्रह है। इसमें अंगिका, अवधी, कन्नौजी, कुमाउँनी, गढ़वाली, बघेली, बज्जिका, बुंदेली, ब्रज, भोजपुरी, मगही, मैथिली और मालवी शामिल हैं। इस शब्दकोश में शब्दों के विस्तृत अर्थ, पर्यायवाची, विलोम, कहावतें और मुहावरे उपलब्ध हैं।

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi volutpat porttitor tortor, varius dignissim.

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY