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रानी वह मेरी

rani wo meri

अनुवाद : श्रीवत्स करशर्मा

चक्रधर राउत

चक्रधर राउत

रानी वह मेरी

चक्रधर राउत

झेलेगी सब कुछ, कहेगी नहीं कुछ

सहनशीला उस-सी ऐसी कहीं?

सुकुमारी कुमारी देखा है कहीं?

पराये के लिए करने वाली अपने को न्योच्छावर?

दुनिया वालों के लिए रक्त-अश्रु अपना बहाकर।

प्राणों का सोता बहाकर क्षुधातुर के मरण-पथ पर

रचेगी 'सोने की पुरी' मर जगत में?

जीवन सुधा-धारा स्पर्श से क्षिति

बनेगी मधुमय, सरम, भीति

तज, ‘आर्त्तसेवा’ प्राण-पण से

कर जो' होगी गिना कोटि में एक

हो वह अकुलीना, अज्ञात, पर

प्राण की प्रियतमा! 'रानी वह' मेरी।

स्रोत :
  • पुस्तक : मेघमुक्त्त मन की कविता (पृष्ठ 13)
  • रचनाकार : चंद्रधर राउत
  • प्रकाशन : दयानिधि राउत, प्राणीमगंल समिति, भुवनेश्वर
  • संस्करण : 2000

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