प्रेम और राजनीति
prem aur rajaniti
एक
धरती घूमती है अपने अक्ष पर
और उसके साथ
घूमता है आकाश
उसके विपरीत
धरती के साथ-साथ
दो
जब प्रेम गहन होता है
तो सीधे रेख में नहीं
तिर्यक नहीं
विपरीत दिशाओं में
चलता है
तीन
विपरीत का विपर्यय
तिर्यक का सीधी रेख में होना
प्रेम में किया गया
समझौता भर है
सरकार की धुरी पर
ओलर जाते हैं मतदाता
सरकार का प्रेम
हर पाँच साल बाद आने वाला
रस्मी त्योहार है
केंद्र पर नहीं
परिधि पर रहकर
जाना जा सकता है
प्रेम और राजनीति
प्रेम की राजनीति को
कहीं भी रहकर नहीं जाना जा सकता
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