Font by Mehr Nastaliq Web

जरिगे भरी जवानी मा

jarige bhari javani ma

मनोज मिश्र ‘कप्तान'

मनोज मिश्र ‘कप्तान'

जरिगे भरी जवानी मा

मनोज मिश्र ‘कप्तान'

और अधिकमनोज मिश्र ‘कप्तान'

    पावन स्वतंत्रता कै, आग लिहे, अगवानी मा,

    जरिगे भरी जवानी मा, ना

    लाल बाल पाल सरीखे, एक से एक पुरोधा।

    कड़ी, हथकड़ी-बेड़ी बाँधे, सावरकर से योद्धा।

    दोहरी उम्रकैद हैं, काटे काला पानी मा,

    जरिगे भरी जवानी मा, ना

    दुर्गा भाभी, ऊदा जी, लक्ष्मी सहगल, झलकारी,

    बेगम हजरत महल, लक्ष्मीबाई जस अवतारी।

    जिंदा लड़ी, अमरता पाइन, मिली भवानी मा,

    जरिगे भरी जवानी मा, ना

    राजगुरु, सुखदेव, भगतसिंह, बटुकेस्वर कै यारी।

    जीवन भर आजाद जिए जे, पंडित बमतुलधारी।

    बिस्मिल बिना भूमिका, नाहीं बनय कहानी मा,

    जरिगे भरी जवानी मा, ना

    मंगल पांडे, तात्या, बिरसा, अमर क्रांति कै गायक

    नेताजी जइसन दुर्लभ हैं, आजादी कै नायक

    सबके नाँउ लिखा है, स्वर्णाक्षर बलिदानी मा,

    जरिगे भरी जवानी मा ना

    स्रोत :
    • पुस्तक : अवधी मिठास (पृष्ठ 56)
    • रचनाकार : मनोज मिश्र ‘कप्तान’
    • प्रकाशन : सर्वभाषा प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2025

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY