Font by Mehr Nastaliq Web

नीव कै पाथर

neev kai pathar

आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

और अधिकआद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

    हम अही नीव कै पाथर हमरी छाती बज्जर अस कठोर,

    हमरी छाती पर डंड करें राजा परजा साह चोर।

    पंडित मुल्ला हमरिन छाती पर चढ़ि के धरम बघारा थीं,

    बीर बाँकुरे हमरिन छाती पाँव पटकि ललकारा थीं।

    हमरे माथे मा होइ पसीना तौ धरती हरियराइ,

    हमरी अँखियन के आँसू से मुरझुराइ सुलुगि जाइ।

    माघ पूस कइ ठिठुरन सब नंगिन छाती पर झेली थै,

    जब तपै जेठ कइ दुपहरिया तपतै सूरज से खेली थै।

    हमरे हाथे का जोर पाइ के पाथर ताजमहल बनिगा,

    हमरिन छाती की कुब्बत से भाखरा बना नंगल बनिगा।

    जंगल-जंगल मा अँटकि भटकि हम सब कइ राह बनाई थै,

    सब सोवइँ सुख कइ निंदिया हम मेहनत कइ अलख जगाई थै।

    नंगे पायन से रौंदि रौंदि काँटन कइ मुह हम तोरी थै,

    हम आपन छाती पटिक-पटिक धरती कइ छाती फोरी थै।

    हम ओका फोरि निकारी थै कोइला पानी रतन खान,

    मुल जेतनइ ओका फोरी थै ओतनइ हम छिरकी थै परान।

    केउ आँख देखावै तौ एका, फिर आँख रही की जान रही,

    हम एकरे रिन से उरिन होब जब तक देह परान रही।

    हम अही सिपाही सीमा पै कसिके संगीन सँभारी थै,

    छाती कै लोहू गारि-गारि माटी कै करज उतारी थै।

    माथे पगिया काँधे हर लइ जब हलधर बनी सेवाँरी मा,

    तब भेद तनिकउ कइ पाई हम माटी मा महतारी मा।

    माटिन मा गति, माटिन मा मति, माटिन मा जनम करम माटा,

    माटिन कइ अही सेवकिहा हम बस माटिन दीन धरम माटी।

    बारहौ महीना, तीसो दिन, चौसठौ घरी कइ पूजा बा,

    माटिन देवता, माटिन अच्छत, हमरे कुछ अउर दूजा बा।

    केउ कुच्छउ कहइ सुनइ कुच्छउ बस आपन डिउटी जानी थै,

    हम आपन जननी जनम भूमि सरगौ से बढ़ि के मानी थै।

    स्रोत :
    • पुस्तक : माटी औ महतारी (पृष्ठ 24)
    • रचनाकार : आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'
    • प्रकाशन : अवधी अकादमी

    संबंधित विषय

    हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

    हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

    ‘हिन्दवी डिक्शनरी’ हिंदी और हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों के शब्दों का व्यापक संग्रह है। इसमें अंगिका, अवधी, कन्नौजी, कुमाउँनी, गढ़वाली, बघेली, बज्जिका, बुंदेली, ब्रज, भोजपुरी, मगही, मैथिली और मालवी शामिल हैं। इस शब्दकोश में शब्दों के विस्तृत अर्थ, पर्यायवाची, विलोम, कहावतें और मुहावरे उपलब्ध हैं।

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi volutpat porttitor tortor, varius dignissim.

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY