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अन्तिम गीत

antim geet

रोचक तथ्य

कविक अन्तिम गीत जे हुनक मरण-सेज पर पाओल गेल।

सुनब वीणा, गाउ अथवा प्राणमय मधुरागिणी।

ओएह छी हम, छथि जकर वाणी स्वयं अनुरागिणी॥

हम स्वयम्भू, सिद्ध साधक, कल्पना चिर-सङ्गिनी।

अछि प्रकृति लीला-निकेतन, भावना नव-रङ्गिनी॥

करथि जय-जयकार हमरे द्विज, मधुप, मधुमक्षिका।

व्याप्त जे सभ ठाम छथि, से हमर अनुखन रक्षिका॥

ज्योति दै छथि स्वयं रवि-शशि, गन्ध-मधु कुसुमावली।

सेज वसुधा, रम्य-गृह पावन गहन कानन-थली॥

हम दिगम्बर, देखितहिँ भयसँ कँपै अछि वासना।

करए रङ्किनि विपति, मुक्तिक हेतु चरम उपासना॥

कए सकै अछि काल की? सम्मुख रहै छथि कालिका।

अमृत अछि हमरा पिअओने श्रीविदेहक बालिका॥

की भला देवेन्द्र, हुनकर तुच्छ की अमरावती!

जखन अछि कैलास, जननी-जनक छथि शङ्कर-सती॥

करत की बन्धन हमर, चिर मुक्त हम, चिर मुक्त हम।

नाक रगड़ै छथि चरण पर स्वयं धनपति अओर यम॥

ककर डर, छथि सिंह-सहचर स्वयं शङ्कर शङ्किता,

देखि लोचन वङ्क, कुसुमायुधक बधु आशङ्किता॥

स्रोत :
  • पुस्तक : भुवनेश्वर सिंह ‘भुवन’ रचना-संचयन (पृष्ठ 112)
  • संपादक : अजीत मिश्र
  • रचनाकार : भुवनेश्वर सिंह ‘भुवन’
  • प्रकाशन : साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली
  • संस्करण : 2024

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