महिला सरपंच के निर्वसन घुमाए जाने पर
mahila sarpanch ke nirwasan ghumaye jane par
दिनेश कुशवाह
Dinesh Kushwah
महिला सरपंच के निर्वसन घुमाए जाने पर
mahila sarpanch ke nirwasan ghumaye jane par
Dinesh Kushwah
दिनेश कुशवाह
और अधिकदिनेश कुशवाह
आपा* मैत्रेयी पुष्पा के लिए
दुहाई देकर निशाना
मछली की आँख में मारा जाता है
और एक स्त्री के
मनमाने इस्तेमाल की
छूट मिल जाती है।
आग लगती है हस्तिनापुर में
और जलता है द्रौपदी का लहँगा
ख़ून हरियाली का होता है
वध मासूमियत का
पंख सुंदरता के नोचे जाते हैं
और सिर्फ़ चिड़िया की आँख
देखने वाले कुछ नहीं देखते।
बोलती औरत को चुप कराने का
एकमात्र हथियार बेहयाई है।
निर्लज्ज लोगो!
दुनिया! आग! हवा! और पानी!
स्त्री ने नहीं बनाया फिर भी
उसी के दम पर सिरजी है दुनिया
उसी के जतन से ज़िंदा है आग
उसी की साँसों से महकती है हवा
स्त्री की आँखों से ही बचा है
धरती का पानी।
_______
*बड़ी बहन
- पुस्तक : इतिहास में अभागे (पृष्ठ 32)
- रचनाकार : दिनेश कुशवाह
- प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन
- संस्करण : 2017
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