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किछु करऽ पड़ै छै

kichhu karऽ paDai chhai

बुद्धिनाथ झा

बुद्धिनाथ झा

किछु करऽ पड़ै छै

बुद्धिनाथ झा

और अधिकबुद्धिनाथ झा

    बूड़ि उएह नहि जे

    पाकल लताम के सिसोहऽ चाहैए

    बूड़ि थिक ओहो जे

    ओहि लताम के सोहऽ चाहैए।

    अर्थात्

    बूड़िअहु बनऽ ले किछु करऽ पड़ै छै

    पाकल लताम के सोहऽ पड़ै छै।

    ककरो अपन मुँह छै

    बरु से बिजुकओने अपन बैसल रहत

    मुदा ककरा एतेक फुरसति छै जे

    ओकरा केओ बूड़िअहु कहत।

    बूडिअहु कहबऽ ले किछु करऽ पड़ै छै

    पाकल लताम के सोहऽ पड़ै छै।

    स्रोत :
    • पुस्तक : अक्षर निर्क्षर (मैथिली काव्य-संग्रह) (पृष्ठ 63)
    • रचनाकार : बुद्धिनाथ झा
    • प्रकाशन : क्रिएटिव कैम्पस प्रकाशन, हैदराबाद
    • संस्करण : 2015

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