पानी गिरने की आवाज़

ऋतुराज

पानी गिरने की आवाज़

ऋतुराज

और अधिकऋतुराज

    पानी गिरने की आवाज़ सब जगह एक जैसी होती है

    पृथ्वी एक है

    बस देश अलग-अलग हो गए हैं

    लेकिन किसी प्यासे आदमी को

    इस बात से कोई मतलब नहीं है

    बारिश में पानी सारी जगहों को सरोबार करता हुआ

    अपना निकास ढूँढ़ता है

    बाढ़ के पछाड़े हुए लोग सब जगह एक जैसे होते हैं

    पीछे छूटे हुए को याद करते

    वे राहत गाड़ियों का इंतज़ार करते रहते हैं

    सताए हुए लोग सब देशों में एक जैसे हैं

    बिना बात तेज़ क़दमों से चलते हुए

    वे कहीं मुँह छिपाने की उम्मीद में बेहद डरे हुए होते हैं

    पत्थरों के कटाव भी सब जगह एक जैसे हैं

    पेड़ों की छायाएँ और अँधेरा सब देशों में

    लगभग एक जैसा ही फैला हुआ है

    कोई झरना जब सूखने लगता है

    तो उसके आस-पास इकट्ठे हुए परिंदों की निराशा

    एक जैसी ही होती है

    सारे देशों में शोषण, नफ़रत और हत्याएँ करने के तरीक़े

    एक जैसे ही तो हैं

    लेकिन इतनी समानताओं के होने के बावजूद

    मैं मजबूर हूँ एक समय में

    एक ही देश में रहने के लिए

    स्रोत :
    • पुस्तक : आशा नाम नदी (पृष्ठ 22)
    • रचनाकार : ऋतुराज
    • प्रकाशन : वाणी प्रकाशन
    • संस्करण : 2007

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