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बिरछन कै अजब कहानी है

birchhan kai ajab kahani hai

आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

बिरछन कै अजब कहानी है

आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

और अधिकआद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

    उपजे धरती कै कोख फारि

    जीवन कइ जोत जगाइ रहे

    गरमी बरखा सीत घाम

    सबका ओढ़ि दसाइ रहे।

    ना तौ करतब मा भूल चूक ना कौनौ आनाकानी है।

    बिरछन कै अजब कहानी है।

    जबसे उपजे तबसे देखौ,

    अंगद अस पाँव अड़ाए हैं,

    सबका आपन परसाद दिहिन,

    जे एनके तर तक आए हैं।

    ना मानें कौनौ ऊँच नीच के ग्यानी के अग्यानी है।

    बिरछन कै अजब कहानी है।

    दूरौ जे रहा वहू का आपन,

    सीतल मंद बयार दिहेन,

    ओनहूँ का ये फल फूल दिहेन,

    जे एनका पाथर मारि दिहेन।

    ये पात पात तक झारि देइँ एनकै जीवन बलिदानी है।

    बिरछन के अजब कहानी है।

    देवता एनकी खातिर तरसैं,

    एनके पायन तर परे रहैं,

    चाहे ये झरि के ठूँठ रहैं,

    चाहे ये कसि के फरे रहैं।

    पीपर तर बैठे महादेव नीबी तरे भवानी है।

    बिरछन के अजब कहानी है।

    फल फूल लसै तौ ओनइ परैं,

    लंगर अस खोलि लुटाइ देंइ,

    जे एनका काटइ बरे ठाढ़,

    ओनके सिर चँवर डोलाइ देंइ।

    ये जहर खाइ वरदान देइँ, येनकै मन औढरदानी है।

    बिरछन कै अजब कहानी है।

    जब फूल खिलैं महमह महकैं,

    पँखुरी-पँखुरी लसिके पराग,

    केउ कुपुटि लेइ केउ नोचि लेइ,

    ये बनि के ठाढ़े बीतराग।

    सबकी खातिर सब सहा करें संतन के यहै निसानी है।

    बिरछन कै अजब कहानी है।

    ये खड़ा रहैं तो मनि बरसै,

    चे चला जाँय सब उजरि जाए,

    बस ये तनिका भै चितइ देई,

    खोपड़ी के गरमी उतरि जाए।

    एनकी चितवन मा अमरित है तेवर भाले सुलतानी है।

    बिरछन कै अजब कहानी है।

    ये राम चिरैयन के बसेर,

    ये बिना सहारन कै बस्ती,

    ये ना होते तौ के करते,

    येन बेचारन कै पर खस्ती।

    दुनिया मा जेतने जल जंगम सब पर एनकी परधानी है।

    बिरछन कै अजब कहानी है।

    ये अच्छयवट के बंसज,

    कलप बिरिछ के सखा सँघाती हैं,

    दुनिया की बंजर छाती पर,

    परकित कै न्यारी थाती हैं।

    आजा लावे नाती खावै केतनी बात पुरानी है।

    बिरछन कै अजब कहानी है।

    जे चाहै येनकें सीस चढ़ा,

    पहिले पाँयन मा हाथ देइ,

    ये अपने पथ पर अडिग सदा,

    चाहे दुनिया ना साथ देइ।

    ये स्वाभिमान कै मूरति हैं येनके रग रग मा पानी है।

    बिरछन कै अजब कहानी है।

    ना तौ केउ होतै महाधनी,

    ना तौ केउ होतै महासूर,

    ये ना होते कुछ ना होतै,

    चारिउ कैती बस उड़त धूर।

    येनहीं से जीवन के बहार एनही के नाम जवानी है।

    बिरछन कै अजब कहानी है।

    ये दानी करन दधीच ई,

    सिबि हरीचंद से ब्रतधारी,

    ये ना होते तौ कैसन होतै,

    दुनिया के फुलवारी।

    लाल गुलाबी नीला-पीला हरियर धानी है।

    बिरछन कै अजब कहानी है।

    यह मा अर्जुन यह मा असोक तुलसी रसाल रसखानी है।

    बिरछन कै अजब कहानी है।

    स्रोत :
    • पुस्तक : माटी औ महतारी (पृष्ठ 65)
    • रचनाकार : आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'
    • प्रकाशन : अवधी अकादमी

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