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आदमी को आदमी की ज़रूरत है

adami ko adami ki zarurat hai

उमा भगत

उमा भगत

आदमी को आदमी की ज़रूरत है

उमा भगत

और अधिकउमा भगत

    अब वो अनाथ बच्ची हँस रही है

    पर थोड़ी देर पहले शायद रो रही थी

    गालों पर आँसू अब भी टिके हुए हैं

    ईश्वर रुला सकते हैं

    हँसा सकते हैं

    लेकिन मैं फिर भी कहूँगी

    हमें लोगों की ज़रुरत है

    ऐसे कहीं किसी गाल पर टिके हुए आँसू

    पोंछने के लिए

    पीठ की घाव पर

    मलहम लगाने के लिए

    सवारी गाड़ी भरने के लिए

    चलने के लिए

    कहीं किसी बंद पिंजरे को

    खोलने के लिए

    खाना सरकने पर

    पानी देने के लिए

    गहरी उदास शामों को

    काटने के लिए।

    स्रोत :
    • रचनाकार : उमा भगत
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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