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अब कैसे दिया बारी

ab kaise diya bari

आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

अब कैसे दिया बारी

आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

और अधिकआद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

    लोहू सनी होली घायल परा मोहर्रम,

    ओह कइत असिल आँसू यह कइत नकल मातम,

    रोवत कि ईद बीती सुसकत गवा दसहरा

    लूटइ छूट केउका, केउके चलै पहरा।

    सब कौनौ तरह गुजरा अब आइ गइ देवारी।

    अब कैसे दिया बारी॥

    बाहर अँजोर बारी अँगना होइ अँधियर,

    अँगना दिया बारी अँधियार रहै बाहर,

    कुँअना की मुड़ेरी पर, दादा की चियारी पर,

    गोरुआर चरही पर, आजी की अँटारी पर।

    एकइ ठु दिया हाँथे चारिउ कइत निहारी।

    अब कइसे दिया बारी॥

    आँसू नदी उमड़ी संकट घटा घेरे,

    संगीन के पहरा मा लूटत अहैं लुटेरे,

    आँधी तुफान बौड़र बाती तेल नाहीं,

    बौराइ के सब भागत केउ के नकेल नाहीं।

    अँधियार भागइ कइ एह कइत बा बेमारी।

    अब कइसे दिया बारी॥

    तेले धार उप्पर बाती फोंक नीचे,

    दाम के दुसासन लछमिउ चीर खींचे,

    अँधरन राज बाटइ एनका अँजोर कइसन,

    अँधेर की नगरी मा के साह चोर कइसन।

    हरिचंद भये झूठा चोर भे मुरारी।

    अब कइसे दिया बारी॥

    मंदिर राम बइठा मसजिद खुदा बाटेन

    दुइ चार ठाँव एकठा सगरौ जुदा बाटेन,

    खुब कस के माथ रगरी, जिउ होमि के चिल्लाई,

    सरधा अकीदत से तोबा करी मनाई।

    जे देस कइ हरजाई ओकै कौन रखवारी।

    अब कइसे दिया बारी॥

    मसजिद के गुम्मजन मा मंदिर कि मिनारन मा,

    हरिओम के झंडन मा चाँद सितारन मा,

    सारे जहाँ मालिक एकै अहै यारौ,

    वतन उहै आपन जौने रहइ यारौ।

    एसी अलग बतावै ओकै गुनहगारी।

    अब कइसे दिया बारी॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : माटी औ महतारी (पृष्ठ 21)
    • रचनाकार : आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'
    • प्रकाशन : अवधी अकादमी

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