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आपन देस महान

aapan des mahan

आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

और अधिकआद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

    चन्ननबासी हवा बहै अमरित घोरा पानी,

    फल के स्वाद फूल कइ खुसबू कैसे जाए बखानी,

    जौने माँगे तौन लुटावै परकित अइसी दानी

    कबहूँ लाल, बसन्ती कबहूँ, कभौं चुनरिया धानी।

    जादू कै मुसकान गोबरधन, जादू कै मुसकान।

    आपन देस महान गोबरधन, आपन देस महान।

    उत्तर दक्खिन पूरब पच्छिउ डाढ़े चारिउ धाम,

    सुबरन मंदिर जामा मस्जिद, ग्यानी गुरू इमाम,

    धरम-करम कै धरती आपन तिकड़म से का काम

    बोलै अस्सलाम आले कुम, आले कुम अस्सलाम।

    जानै सकल जहान गोबरधन, जानै सकल जहान।

    आपन देस महान गोबरधन, आपन देस महान।

    हमरी कइती आँख उठावै मारी ताकि निसाना,

    आगे बढ़ि के हाथ मिलावै ताकी प्रीति निभाना,

    हिंदू मुस्लिम सिख इसाई सबकै एक तराना

    ना केउ से केउ मोट गोबरधन, ना केउ से केउ काना।

    सब एकै तस्मान गोबरधन सब एकै तस्मान।

    आपन देस महान गोबरधन, आपन देस महान।

    तीन लोक संपदा जनम से एकै बनी बपौती,

    सोना चानी रतन खान पन्ना हीरा मोती,

    एकर सान अकासे झूलै सरग झुरानी धोती

    अचरज भरि के आँख लिलोरें रान परोसी गोती।

    देवतौ लखि ललचान गोबरधन, देवतौ लखि ललचान।

    आपन देस महान गोबरधन, आपन देस महान।

    राम किसन गौतम गाँधी की मरजादा कै माटी,

    बढ़े ढंग के ढाँचा पाए बढ़े रंग के कोठी,

    आन-बान पर जान निछावर पुरखन के परिपाटी

    माथे चंदन, गरवा गमकै केसर वाली घाटी।

    पहरा पर हिमवान गोबरधन पहरा पर हिमवान।

    आपन देस महान गोबरधन, आपन देस महान।

    संकट आवै कभौं देस पर भेदभाव बिसराई,

    अफलातून बनै जे ओकै झारी थै औंघाई,

    सबसे बड़ी सबैसे उप्पर, आपन धरती माई

    रच्छा खातिर एक बरन होइ ठाढ़ा राम देहाई।

    सम्मै हिंदुस्तान गोबरधन सम्मै हिंदुस्तान।

    आपन देस महान गोबरधन, आपन देस महान।

    आजादी के अलख जगावत फहरै सरग तिरंगा,

    चाँद सुरुज आरती देखावैं अरघ चढ़ावै गंगा,

    सबके मन कै मिटावै सबका मनुआ चंगा

    चरन धोइ के माथ चढ़ावै उच्छल जलधि तरंगा।

    यहिं पर हमै गुमान गोबरधन यहिं पर हमैं गुमान।

    आपन देस महान गोबरधन, आपन देस महान।

    राना सिवा फतेह जोरावर बंदा वैरागी,

    भगत सुभाष राजगुरु सेखर घर कुरिया सब त्यागी,

    गाँधी नेहरू जनमि-जनमि के कोख बनी बड़भागी

    बीत राग होइगे अपनन से देसवा के अनुरागी।

    के है एकरी खान गोबरधन के है एकरी खान।

    आपन देस महान गोबरधन, आपन देस महान।

    स्रोत :
    • पुस्तक : माटी औ महतारी (पृष्ठ 47)
    • रचनाकार : आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'
    • प्रकाशन : अवधी अकादमी

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