ससरा अबोले, सासू अबोले
sasra abole, sasu abole
ससरा अबोले, सासू अबोले
किनी पत मंदरियां आवां हो
जेठ अबोले, जेठानी अबोले
किनी पत मंदरिये आवां हो
सास मनावां, ससरा मनावां
डंकारा समूचे आया हो
जेठ मनावां जेठानी मनावां
तेल-सिन्दूर लई आवां हो
देवर अबोले, देवराणी अबोले
देवर मनावो, देवराणी मनावां
फलड़ा लई ने आवां हो
यो मड़ गाजे, भेरूजी नौबत बाजे
पुत्र अबोले, कुलबऊ अबोले
पुत्र मनावां, कुलबऊ मनावां
घी-खिचड़ी लई ने आवां हो
मो मड़ गाजे, भेरूजी नौबत बाजे
नणंद अबोले, पनदोई अबोले
नणंद मनावां, नणदोई मनावां
आरती लई ने आवां हो
स्वामी अबोले, सोकड़ अबोले
किनी पत मंदरिये आवां हो
स्वामी मनावां, सोकड़ मनावां
रूपयो नारेक लई ने आवां हो
ससुर से अबोला, सास से अबोला है
किस तरह मंदिर आएं
जेठ से अबोला, जिठानी से अबोला है
किस तरह मंदिर आएं
सास मनायेंगे, ससुर मनायेंगे
डंकों के साथ आयेंगे
जेठजी को मनायेंगे, जिठानी को मनायेंगे
तेल-सिंदूर ले कर आयेंगे
देवर से अबोला, देवरानी से अबोला है
देवर मानायेंगे देवरानी मनायेंगे
फूल लेकर आयेंगे जी
यह मंदिर गूंज रहा है, भेरूजी नौबत बज रही है
किस तरह मंदिर आयें जी
मेरे काले-गोरे यह मंदिर गूँज रहा है, भेरूजी नौबत बज रही है
पुत्र की मनायेंगे, कुल बहु मनायेंगे
खिचड़ी लेकर आयेंगे
ननद मनायेंगे, ननदोई मनायेंगे
आरती लेकर आयेंगे जी
स्वामी से अबोला, सौतन से अबोला है
किस तरह मंदिर में आयें जी
स्वामी मनायेंगे, सौतन मनायेंगे
रूपया नारियल ले कर आयेंगे जी
- पुस्तक : मालवा के लोक गीत (पृष्ठ 8)
- संपादक : कपिल तिवारी, नवल शुक्ल
- रचनाकार : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित।
- प्रकाशन : मध्यदेश आदिवासी लोक कला परिषद्
- संस्करण : 1995
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