चौपाई

चार चरणों का सम मात्रिक छंद। प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ. चरण के अंत में गुरु-लघु (ऽ।) वर्जित।

कृष्ण-भक्त कवि। गोस्वामी हितहरिवंश के शिष्य। सरस माधुर्य और प्रेम के आदर्श निरूपण के लिए स्मरणीय।