Font by Mehr Nastaliq Web
noImage

शृंगारी कवि। नायिका के अंग-वर्णन के लिए प्रसिद्ध। एक-एक अंग पर सौ-सौ दोहे लिखने के लिए स्मरणीय।

शृंगारी कवि। नायिका के अंग-वर्णन के लिए प्रसिद्ध। एक-एक अंग पर सौ-सौ दोहे लिखने के लिए स्मरणीय।

मुबारक की संपूर्ण रचनाएँ

दोहा 14

गोरे मुख पर तिल लसे ताहि करौ परनाम।

मानहु चंद बिछाइकै बैठे सालिगराम॥

गोरे मुख पर तिल लसत मेटत है दुख द्वंद।

मानहु बेटा भानु को रह्यो गोद लै चंद॥

तिय निहात जल अलक ते, चुवत नयन की कोर।

मनु खंजन मुख देत अहि, अमृत पोंछि निचोर॥

विधि कपोल टिकिया करी, तहँ तिल धरो बनाय।

यह मन छधित फकीर ज्यों, रहैं टकटकी लाय॥

छूटो चंदन भाल तें, अलक ऊपर छबि देत।

डसी उलटि मनु नागिनी उदर बिराजत सेत॥

सवैया 9

कवित्त 3

 

Recitation