यदि एक बार तुम मुझे बाँध लो बाँहों में...
yadi ek baar tum mujhe baandh lo banhon mein. . .
ज्ञानराज माणिकप्रभु
Gyanraj Manikprabhu
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यदि एक बार तुम मुझे बाँध लो बाँहों में...
yadi ek baar tum mujhe baandh lo banhon mein. . .
Gyanraj Manikprabhu
ज्ञानराज माणिकप्रभु
और अधिकज्ञानराज माणिकप्रभु
यदि एक बार तुम मुझे बाँध लो बाँहों में।
मैं जीवन भर के लिए मुक्त हो जाऊँगा।
भव बंधन में हूँ बँधा मुझे तुम मुक्त करो।
निज प्रेम-भाव बाँहें पसारकर व्यक्त करो।
बस एक बार तव आलिंगन-सुख पा जाऊँ।
मैं पूर्ण रूप से प्रभो तृप्त हो जाऊँगा।
निज कृपा-सुधा से प्रभो मुझे अभिषिक्त करो।
संतप्त हृदय को प्रेम सलिल से सिक्त करो।
यह दाह विरह का शाँत ज़रा हो जाए फिर।
तव सेवा में अत्यंत व्यस्त हो जाऊँगा।
निज हृदयकमल से प्रभो मुझे सम्पृक्त करो।
इस ज्ञानहीन को विमल ज्ञान से युक्त करो।
बस एक बार तुम मुझे लगा लो निज उर से।
मैं एकनिष्ठ उत्कृष्ट भक्त हो जाऊँगा।
- रचनाकार : ज्ञानराज माणिकप्रभु
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
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