'तथापि' उपन्यास हिंदी के कवि ह्दय कथाकार की एक ऐसी रचना है जिसने अपने समय, समयगत द्वंद्व, संवेदना, स्वप्न , संकल्पों और चुनौतियों को अधिक प्रखर बनाया है। यही एक ऐसा लैंस है जिसके माध्यम से तथापि का यह आख्यान अपने समय को एक भिन्न लीला-समय में देखने की चमत्कारी और तृप्तिदायक अनुभूति कराता है।