इस पुस्तक में विचारधाराओं के समसामयिक महत्वों की विवेचना की गई है। शांतिप्रिय द्विवेदी जी ने अपनी इससे पहले प्रकाशित हुई किताब 'युग और साहित्य में' में प्रगतिशील दृष्टिकोण को प्रधानता दी थी। इस पुस्तक में उन्होंने गांधीवादी विचारधारा को केंद्र में रखा है।