राजा और प्रजा प्रस्तुत पुस्तक रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा रचित है। राजा और प्रजा नामक निबंधावली का अनुवाद है। निबंध पुराने हैं, कोई कोई तो 25-26 वर्ष पहले के लिखे हुए है; फिर भी वे नये से मालूम होते हैं। उनमें जिन सत्यों पर विचार किया गया है, वे सार्वकालिक और सार्वदेशीय हैं, और इस लिए वे कभी पुराने नहीं हो सकते—उनकी जीवनी शक्ति सदा स्थिर रहेगी। ये निबन्ध अध्ययन और मनन करने योग्य हैं