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लेखक: परिचय

रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’ का जन्म 1 मई 1915 को उत्तर प्रदेश के फ़तेहपुर ज़िले के किशनपुर गाँव में हुआ था। वह पंडित मातादीन शुक्ल के पुत्र थे जो ‘छात्र-सहोदर’ पत्रिका के संपादक थे। शिक्षा पूरी कर जबलपुर विश्वविद्यालय में अध्यापन शुरू किया और इसके साथ ही रचनात्मक सर्जना में जुटे रहे। वह छायावाद युग के अंतिम दौर से संबद्ध रचनाकार थे और बाद में उन्होंने मार्क्सवादी और प्रगतिशील कविताएँ भी लिखी। उनकी भाषा के नए विशेषण और नए उपमान के लिए उन्हें चिह्नित किया गया था। 

‘मधुलिका’, ‘अपराजिता’, ‘किरणबाला’, ‘करील’, ‘लाल चुनर’, ‘वर्षांत के बादल’, ‘विराम-चिह्न’ उनके प्रमुख काव्य-संग्रह हैं। ‘तारे’ और ‘यह वह बहुतेरे’ उनकी कहानियों के संग्रह हैं और उनके उपन्यास ‘चढ़ती धूप’, ‘नई इमारत’, ‘उल्का’ और ‘मारु प्रदीप’ शीर्षक से प्रकाशित हैं। ‘रामेश्वर शुक्ल अंचल समग्र’ में उनकी उपलब्ध कृतियों का संकलन किया गया है। 

वह जबलपुर विश्वविद्यालय से डी लिट् की मानद उपाधि, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा प्रदत सम्मान, हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा साहित्य वाचस्पति सम्मान, राष्ट्रपति द्वारा विशेष सम्मान आदि से प्रशंसित किए गए।

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