प्रस्सुत पुस्तक हिन्दी साहित्य का उत्तर मध्यकाल रीतिकाल का मूल उद्देश्य है कि रीतिकालीन साहित्य-विषयक उपलब्ध तथ्यों एवं प्रचलित मान्यताओं के प्रमाणिक आख्यान और पुनराख्यान के साथ तत्वसंबंधी नवीन तथ्यों का उद्घाटन। एक चेतना धारा के रूप में इस युग के साहित्य की समग्र चेतना का दिग्दर्शन कराने का प्रयत्न किया है।