यह सुबोध द्वारा किया गया गीतांजलि बांग्ला मूल के साथ हिंदी रूपांतर है। इस पुस्तक में कविवर रविंदरनाथ जी ने कविताओं के माध्यम से ईश्वर से मिलन की आश अपने मन मेें पैदा किया है। इनकी कविता हद्य के मार्मिक स्पंदनसे पूर्ण है और इसमें प्रेम पूरी तरह व्यापत है।