एक सुबह और... इन कहानियों में प्रतिमा वर्मा ने पति-पत्नी क के बीच आधुनिक जीवन की जटिलताओं से उत्पन्न, विक्षोभ नारी की बेबसी से उत्पन्न समझौतावादी, मनोवृत्ति, व्यावसायिकता के कारण संवेदनाओं से रिक्त हुए व्यक्ति का मानसिक दारिद्रय तथा पूरे समाज घून की तरह लग जाने वाली स्वार्थपरता आदि को परत-दर-परत उधेड़कर रखने की कोशिश की है।