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लेखक : डॉ भगवानदास

संस्करण संख्या : 003

प्रकाशक : ज्ञानमण्डल लिमिटेड, बनारस

प्रकाशन वर्ष : 1953

भाषा : हिंदी

श्रेणियाँ : दर्शनविषयक

पृष्ठ : 301

सहयोगी : भारतीय भाषा परिषद ग्रंथालय

दर्शन का प्रयोजन

पुस्तक: परिचय

'दर्शन का प्रयोजन' भारत में 'दर्शन' उस विद्या को कहा जाता है जिसके द्वारा तत्व का ज्ञान हो सके। मानव के दुखों की निवृति के लिए और/या तत्व ज्ञान कराने के लिए ही भारत में दर्शन का जन्म हुआ है।

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