'अवतार' पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' की यह पुस्तक उन आलोचकों के लिए है जिन्होंने 'उग्र' जी के व्यक्तित्व को नहीं समझ पाए। आज उग्र जी के साहित्य ने अपना सुनिर्दिष्ट स्थान प्राप्त कर लिया है। शैलीकार उग्र के व्यक्तित्व से बहुत से लोग नाराज़ हो जाते थे क्योंकि वह व्यावहारिक कम मुँह फट अधिक थे किंतु उग्र ह्दय से निष्कपट, निर्मल और ईमानदार आदमी थे। स्वाभिमानी और नि:स्वार्थी तो प्रथम श्रेणी के थे, इसलिए उग्र को समझने के लिए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व में अंतर करना अब नितातं आवश्यक है।